भाजपा-शिवसेना में समझौता के पीछे का सच!

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मुंबई। महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के बीच आखिरकार खींचतान के बीच चुनावी समझौता हो गया है। लोकसभा में भाजपा 25 और शिवसेना 23 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसीतरह विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। हालांकि इस गठबंधन से दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में अंदरखाने नाराजगी के सुर भी सुनाई दे रहे हैं।
अंदरखाने नाराजगी के सुर
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में चुनावी गठजोड़ पर मोहर लगाई गई। राज्य की 48 संसदीय सीटों में से भाजपा 25 और शिवसेना 23 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। विधानसभा की 288 सीटों में भाजपा और शिवसेना 140-140 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। भाजपा अपने कोटे से अन्य सहयोगी दलों को सीटें देगी। दावा है कि दोनों दल मिलकर लोकसभा की 45 सीटों पर विजय हासिल करेंगे और विधान सभा चुनाव में भी पूर्ण बहुमत हासिल करके महाराष्ट्र में दोबारा सरकार बनाएंगे। किसानों से जुड़े मुद्दों को जल्द से जल्द सुलझाने पर सहमति बनी है। शिवसेना की राममंदिर निर्माण की मांग पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भरोसा दिलाया कि भाजपा का अगर कोई सबसे पुराने साथी हैं तो वे शिवसेना और अकाली दल है जिन्होंन हर वक्त हमारा साथ दिया है।
भाजपा और शिवसेना ने राम मंदिर और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद जैसे कई मुद्दों को दशकों से एकसाथ उठाया है। हमारे बीच जो भी मतभेद रहें हैं, उसे हम खत्म करते हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि 25 वर्षो से दोनों दलों की मित्रता रही है। हमारे बीच कुछ मुद्दों लेकर मतभेद होते रहें हैं लेकिन हमारे विचार एक हैं। यह सारे मतभेदों को भुलाकर एकसाथ आने का वक्त है। हम किसानों से जुड़े मुद्दों को जल्द से जल्द सुलझाएंगे। हमने यह फैसला राष्ट्र के हित में लिया है और हमें विश्वास है कि एनडीए गठबंधन फिर से सत्ता में वापसी करेगा। उद्धव ठाकरे ने कहा कि हमारे बीच थोड़े मतभेद जरूर हैं लेकिन हमारे मन एकदम साफ है। राम मंदिर का मुद्दा हम हमेशा से उठाते रहे हैं। हमारे बीच जो भी मतभेद थे उनको लेकर अमित भाई से बातचीत हो गई है। हम कोशिश करेंगे कि आगे ऐसी स्थिति दोबारा न आए। याद दिला दें कि भाजपा ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में 26 सीटों पर चुनाव लड़ा और 23 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि शिवसेना ने 22 सीटों पर चुनाव लड़ा और 18 सीटों पर विजयी रही।
इधर गठबंधन को लेकर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। पालघर संसदीय सीट शिवसेना को दिए जाने से भाजपा में नाराजगी है। इसी प्रकार इशान्य मुंबई संसदीय सीट पर किरीट सोमैया की उम्मीदवारी पर शिवसेना ने विरोध का सुर तेज किया है। इस तरह की स्थिति अन्य संसदीय सीटों में भी देखी जा रही है। उठ रही हैं। पालघर भाजपा जिलाध्यक्ष पास्कल धनारे को नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस्तीफे सौंपे हैं। ईशान्य मुंबई में इस समय भाजपा के सांसद किरीट सोमैया है। मुलुंड व भांडुप के शिवसैनिकों ने उद्धव ठाकरे से मांग की है कि अगर भाजपा फिर से किरीट सोमैया को उम्मीदवारी देती है तो , वह चुनाव प्रचार का काम नहीं करेंगे। भले ही उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। अन्य संसदीय क्षेत्रों में भी नाराजगी के सुर उभर रहे हैं। कार्यकर्ताओं को मनाने की कोशिश दोनों दलों में की जा रही है।
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